Posted by: bhaikush on: May 25, 2007
लिखी थी कुछ बातेंरात को तुमने और मैने ….
उजाले ने खोल दी मुट्ठीऔर रात उड़ गयी ..रोशनी चुपके सेकमरे में उतर आई…
उनंदी निगाओ सेतुमको देखा, आज पहली सुबह हैअपने सीने से तुम्हाराहाथ हटाया, कितनी मासूम सी सोई थी..
माथे पर तुम्हारेफैला हुआ सिंदूरकिसी साँझ कीलाली का एहसास कराता है..
खिड़की से देखती बेलने शायद तुमको छुआ होगाकितनी [...]
Posted by: bhaikush on: May 25, 2007
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इक रोज़ किसी नेदरवाज़ा खटखटाया था
देखा जो झाँक कर एक लिफाफ़ा मिलाखोला तो इक रात पड़ी थीकाग़ज़ में लिपटे हुएमैने उठाकर सेंकली, जलतीहुई लकड़ियो परपहले से और काली,वो रात हो गयी थी ….उस रात जब संग मेरेतुम चले थे पल दो पलवो राहें आकर के मेरेपैरो से लिपट गयीपूछने लगी तुम्हारे साथवाले क़दमो के निशान [...]
Posted by: bhaikush on: May 25, 2007
May 24(1 day ago)
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मैने लिख दिया थानाम तेरा और मेरा…
मगर किसी कोये नागवार गुज़राउसने मिटाई हस्तीदरखतो सेकुछ इस तरह…की रेत से भ्री मुट्ठीख़ाली हो चुकी थीतू रख लेती मुझे,पायल बनाकर तोतेरे क़दमो में रह लेताकिसी तरहमगर तूने बनाकर आँसूमुझे..अपनी निगाओ से गिरा दिया,,
मैने लिख दिया थानाम तेरा और मेरा रेत [...]
Posted by: bhaikush on: May 25, 2007
लिखी थी कुछ बातेंरात को तुमने और मैने ….
उजाले ने खोल दी मुट्ठीऔर रात उड़ गयी ..रोशनी चुपके सेकमरे में उतर आई…
उनंदी निगाओ सेतुमको देखा, आज पहली सुबह हैअपने सीने से तुम्हाराहाथ हटाया, कितनी मासूम सी सोई थी..
माथे पर तुम्हारेफैला हुआ सिंदूरकिसी साँझ कीलाली का एहसास कराता है..
खिड़की से देखती बेलने शायद तुमको छुआ होगाकितनी [...]
Posted by: bhaikush on: May 25, 2007
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इक रोज़ किसी नेदरवाज़ा खटखटाया था
देखा जो झाँक कर एक लिफाफ़ा मिलाखोला तो इक रात पड़ी थीकाग़ज़ में लिपटे हुएमैने उठाकर सेंकली, जलतीहुई लकड़ियो परपहले से और काली,वो रात हो गयी थी ….उस रात जब संग मेरेतुम चले थे पल दो पलवो राहें आकर के मेरेपैरो से लिपट गयीपूछने लगी तुम्हारे साथवाले क़दमो के निशान [...]
Posted by: bhaikush on: May 25, 2007
May 24(1 day ago)
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मैने लिख दिया थानाम तेरा और मेरा…
मगर किसी कोये नागवार गुज़राउसने मिटाई हस्तीदरखतो सेकुछ इस तरह…की रेत से भ्री मुट्ठीख़ाली हो चुकी थीतू रख लेती मुझे,पायल बनाकर तोतेरे क़दमो में रह लेताकिसी तरहमगर तूने बनाकर आँसूमुझे..अपनी निगाओ से गिरा दिया,,
मैने लिख दिया थानाम तेरा और मेरा रेत [...]
Posted by: bhaikush on: May 23, 2007
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कल शाम बर्फ़ गिरी थीवादियो में कही..और ठंड फैल गयीउजाले की तरह..
मैने तुम्हारीगोद को लिहाफ़ बनाया था..
फिर आँखें बंद हुईमैं कही खो गया..तू थपथपाती रहीकांधे को मेरे..
मुझे फिर से..तेरा ख्वाब आया था..
खुली जो आँखेंथमी सांसो से, कुछ पूछातुम कुछ नही बोलीवैसे ही रही..
पर आँखो सेतुम्हारी, इक जवाब आया था…
बड़ी अजीब बात हैकैसे करू यक़ीन…वो प्यार [...]
Posted by: bhaikush on: May 23, 2007
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कल शाम बर्फ़ गिरी थीवादियो में कही..और ठंड फैल गयीउजाले की तरह..
मैने तुम्हारीगोद को लिहाफ़ बनाया था..
फिर आँखें बंद हुईमैं कही खो गया..तू थपथपाती रहीकांधे को मेरे..
मुझे फिर से..तेरा ख्वाब आया था..
खुली जो आँखेंथमी सांसो से, कुछ पूछातुम कुछ नही बोलीवैसे ही रही..
पर आँखो सेतुम्हारी, इक जवाब आया था…
बड़ी अजीब बात हैकैसे करू यक़ीन…वो प्यार [...]
Posted by: bhaikush on: May 23, 2007
कल शाम उपर वाले कमरे मेंजहा से डाल सटी है गुल्मोहर की…
मैं बैठा वही अपनी डायरी मेंकुछ लिख रहा था..सूरज दूर तो था लेकिन अस्त होतामुझे क़रीब सा दिख रहा था..
मैने सोचा कुछ लिखू आजतुम्हारे लिएइतने में … सब कहने लगेआख़िर ये सब लिखते हो किसके लिए
जिसका नाम भी हमे पता नहीकाम से काम इतना [...]
Posted by: bhaikush on: May 23, 2007
कल शाम उपर वाले कमरे मेंजहा से डाल सटी है गुल्मोहर की…
मैं बैठा वही अपनी डायरी मेंकुछ लिख रहा था..सूरज दूर तो था लेकिन अस्त होतामुझे क़रीब सा दिख रहा था..
मैने सोचा कुछ लिखू आजतुम्हारे लिएइतने में … सब कहने लगेआख़िर ये सब लिखते हो किसके लिए
जिसका नाम भी हमे पता नहीकाम से काम इतना [...]
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