Posted by: bhaikush on: June 22, 2007
क्या लिखू तेरे लिए
हर शब्द तड़पता है तेरी तारीफ़ में समानेे के लिए
तुझे ज़िंदगी कह दु तो चलेगा या फिर दूसरा कोई नाम क हू..
सुबह की लालीमा कह दु या फिर ख़ुशनुमा कोई शाम क हू..
तुझे दरिया का पानी कह दु.. दादी की कहानी कह दु…
कह दु तुझे खिलता फूल कोई [...]
Posted by: bhaikush on: June 22, 2007
क्या लिखू तेरे लिए
हर शब्द तड़पता है तेरी तारीफ़ में समानेे के लिए
तुझे ज़िंदगी कह दु तो चलेगा या फिर दूसरा कोई नाम क हू..
सुबह की लालीमा कह दु या फिर ख़ुशनुमा कोई शाम क हू..
तुझे दरिया का पानी कह दु.. दादी की कहानी कह दु…
कह दु तुझे खिलता फूल कोई [...]
Posted by: bhaikush on: June 9, 2007
झील के किनारेतन्हा बैठे हुए
यादो में किसी कीखोया हुआ था..की अचानक एक गुलाबगिरा पानी पर
कुछ तरंगे बन गयीहिलते हुए पानी में..एक तस्वीर नज़र आई थीसुर्ख़ गुलाबी तेरी ही थी..
अबकी बार कुर्ता गुलाबी थाबिल्कुल तेरे होटो की तरह..जिन्हे छूने कोमेरे लब बेकरार रहते थे..
उंगलिया मचलने लगीपानी में उतरने को..सोचा एक बार तेरेगालो को छ्हू लिया जाए..
लेकिन [...]
Posted by: bhaikush on: June 9, 2007
उफ़!! ये पति देव मेरे
सोते देर से हैऔर उठ ते भी देर से..चिल्ला चिल्ला के थक जाएचाहे क्ववा भी मुंडेर से…
bed टी चाहिए, साथमें सुबह का अख़बारथोड़ी सी भी ठंडी हो चायतो परा सातवे आसमा पार
सुबह सुबह होता है ये हाल…उफ़!! ये पति देव मेरे
पानी गरम कर दिया क्यानाश्ते में क्या बनाया हैमुझे लेट हो [...]
Posted by: bhaikush on: June 9, 2007
झील के किनारेतन्हा बैठे हुए
यादो में किसी कीखोया हुआ था..की अचानक एक गुलाबगिरा पानी पर
कुछ तरंगे बन गयीहिलते हुए पानी में..एक तस्वीर नज़र आई थीसुर्ख़ गुलाबी तेरी ही थी..
अबकी बार कुर्ता गुलाबी थाबिल्कुल तेरे होटो की तरह..जिन्हे छूने कोमेरे लब बेकरार रहते थे..
उंगलिया मचलने लगीपानी में उतरने को..सोचा एक बार तेरेगालो को छ्हू लिया जाए..
लेकिन [...]
Posted by: bhaikush on: June 9, 2007
उफ़!! ये पति देव मेरे
सोते देर से हैऔर उठ ते भी देर से..चिल्ला चिल्ला के थक जाएचाहे क्ववा भी मुंडेर से…
bed टी चाहिए, साथमें सुबह का अख़बारथोड़ी सी भी ठंडी हो चायतो परा सातवे आसमा पार
सुबह सुबह होता है ये हाल…उफ़!! ये पति देव मेरे
पानी गरम कर दिया क्यानाश्ते में क्या बनाया हैमुझे लेट हो [...]
Posted by: bhaikush on: June 7, 2007
कोशिश करता हूगिर जाता हू..फिर करता हूफिर गिरता हू..रुकता नही हूगिरता हूसंभलता हूग़ुस्से से थोड़ामचलता हूफिर सोचता हूकुछ पाना है मुझकोलंबी साँस भरता हूफिर कोशिश करता हूगिर जाता हूफिर करता हूफिर गिरता हू…..
Posted by: bhaikush on: June 7, 2007
नींद के गर्भ मेंलात मारते कुछ सपनेइनका सीमंतन..चल रहा है …..ये संस्कार इन सपनो कोनयी दीशाए देंगे..तब भी जब रूठ जाएगी आँखेख़ुशियो का संसार देंगे.सपनो का गर्भ में प्लनाकितना ख़ूबसूरत होता है ..मगर जब आती है बारीइनकी गर्भ से निकलने कीतभी कुछ हो जाता है ….फिर अब की बार केसकॉम्प्लेक्स हो गया हैएक सपना जीना [...]
Posted by: bhaikush on: June 7, 2007
तेरी ओर आने वाले रास्तेजानता मैं नही..फिर भी पाना है तुझकोजैसे बहता हुआ दरियामिल जाता है समंदर मेंक्ंटको के रास्तो से..फिर पा जाता है मंज़िल अपनीशायद ये लहरे बहाओ से नहीहॉंसलो से बहती है ….निरंतर.. अकारण उन्माद में…इनके पास वजह लगती हैप्रफुललित होने की..एक मैं हू जिसे रास्ते की तलाश हैभीड़ भरी दुनिया मेंअकेला खड़ा [...]
Posted by: bhaikush on: June 7, 2007
कोशिश करता हूगिर जाता हू..फिर करता हूफिर गिरता हू..रुकता नही हूगिरता हूसंभलता हूग़ुस्से से थोड़ामचलता हूफिर सोचता हूकुछ पाना है मुझकोलंबी साँस भरता हूफिर कोशिश करता हूगिर जाता हूफिर करता हूफिर गिरता हू…..
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