“कुश की कलम”

Archive for July 2007

—————–
पाँच सालनही टी-क-ती सरकारतुम कैसे टिक गयेज़िंदगी में मेरी,उसने कहा इस बारफ़रवरी में दिन28 थे….
————————–
एक ग़ज़ल आकरगिरती है आँगन पर,कुछ शेर ज़मीपर छोड़ जाती हैमैं अटका रहता हूकुछ मिश्रो मेंतेरे क़दमो के निशानउसी ज़मी पर पाता हू..
————————
-कुश

—————————–रात गिर गयीकल तूफ़ान तेज़ आया थाया फिर दरारो सेमहक तेरी गयी ,कल रात मैनेचाँद को हिलते देखा था————————-
याद हैतुम्हारी बनाई सब्ज़ीमें, कितने नुक्सनिकालता था..करेला नही खाने केकितने बहाने थे,तुम अब मुझे खिलतीनही हो, परअब मुझे करेला अच्छालगता है..
—————–
पाँच सालनही टी-क-ती सरकारतुम कैसे टिक गयेज़िंदगी में मेरी,उसने कहा इस बारफ़रवरी में दिन28 थे….
————-
शाम से थोड़ा [...]

—————————–रात गिर गयीकल तूफ़ान तेज़ आया थाया फिर दरारो सेमहक तेरी गयी ,कल रात मैनेचाँद को हिलते देखा था————————-
याद हैतुम्हारी बनाई सब्ज़ीमें, कितने नुक्सनिकालता था..करेला नही खाने केकितने बहाने थे,तुम अब मुझे खिलतीनही हो, परअब मुझे करेला अच्छालगता है..
—————–
पाँच सालनही टी-क-ती सरकारतुम कैसे टिक गयेज़िंदगी में मेरी,उसने कहा इस बारफ़रवरी में दिन28 थे….
————-
शाम से थोड़ा [...]

तेरे होंठो की महक लेकरहवा का इक झोंका मेरी और आयाछु गया मेरी आँखो को औरकुछ हसीं ख्वाब गिर गये
मैने बाँधकर ख्वाबो कोरख दिए सिरहाने…अब बस तुम्हे सौप कर इन्हेचैन से सो जाना चाहती हू
तुम एक बार जो हा केह्दोमैं ज़िंदगी भर के लिए..तुम्हारी हो जाना चाहती हू
मोहब्बत का इक बिस्तर होजिसपे चाँद का तकिया [...]

तेरे होंठो की महक लेकरहवा का इक झोंका मेरी और आयाछु गया मेरी आँखो को औरकुछ हसीं ख्वाब गिर गये
मैने बाँधकर ख्वाबो कोरख दिए सिरहाने…अब बस तुम्हे सौप कर इन्हेचैन से सो जाना चाहती हू
तुम एक बार जो हा केह्दोमैं ज़िंदगी भर के लिए..तुम्हारी हो जाना चाहती हू
मोहब्बत का इक बिस्तर होजिसपे चाँद का तकिया [...]

"मा की लोरी…"

Posted by: bhaikush on: July 13, 2007

———————————-
आसमा की चादर पे मुन्ना राजा लेटेगारात भर chakri में चंदा मामा बैठेगातारो ने भी कैसी टोली है जमाई रेमुन्ने राजा को लेने डोली भिज़वाई रे..
आई रे..नीनू आई रे…
परियो वाले देश मेंराजा वाले भेष मेंमुन्ने को मिलेगी परीफूल डाले केश में
मुन्ने को देख करपरी भी शरमाई रे…
आई रे..नीनू आई रे…
ऊँचे ऊँचे महल होंगेखीर पुड़ी बर्फ़ीमुन्ना [...]

ek situation vishesh pe likhi gayi poem

Posted by: bhaikush on: July 13, 2007

————————————-अरे भई सोहन!!हा कुछ हिया ई पुकारत हैहमार भाई साब !!अब का करे हम ऊकाऊ है ही बड़े मज़ाकी
सीढ़ी उतरते उतरते बोलेये अपना मुकुंद कुमार कहा हैहमार खोपड़ी चकराईई ससुरा मुकुंद कुमार कौन?तो हम बोले की बावलेमुकुंद कुमार अपना डिराइवर
हम मुस्कुराई के अपना सरखुजाते रह गये …अब का करे हम ऊकाऊ है ही बड़े मज़ाकी
इसपेसल [...]

"मा की लोरी…"

Posted by: bhaikush on: July 13, 2007

———————————-
आसमा की चादर पे मुन्ना राजा लेटेगारात भर chakri में चंदा मामा बैठेगातारो ने भी कैसी टोली है जमाई रेमुन्ने राजा को लेने डोली भिज़वाई रे..
आई रे..नीनू आई रे…
परियो वाले देश मेंराजा वाले भेष मेंमुन्ने को मिलेगी परीफूल डाले केश में
मुन्ने को देख करपरी भी शरमाई रे…
आई रे..नीनू आई रे…
ऊँचे ऊँचे महल होंगेखीर पुड़ी बर्फ़ीमुन्ना [...]

ek situation vishesh pe likhi gayi poem

Posted by: bhaikush on: July 13, 2007

————————————-अरे भई सोहन!!हा कुछ हिया ई पुकारत हैहमार भाई साब !!अब का करे हम ऊकाऊ है ही बड़े मज़ाकी
सीढ़ी उतरते उतरते बोलेये अपना मुकुंद कुमार कहा हैहमार खोपड़ी चकराईई ससुरा मुकुंद कुमार कौन?तो हम बोले की बावलेमुकुंद कुमार अपना डिराइवर
हम मुस्कुराई के अपना सरखुजाते रह गये …अब का करे हम ऊकाऊ है ही बड़े मज़ाकी
इसपेसल [...]