Posted by: bhaikush on: August 18, 2007
उदास रात है आज, आ जाओ फिर सेज़मी पे नूर की चादर बिछओ फिर से..
बड़े दीनो से सोया नही है इक पलकी अपनी पॅल्को में दिल को सुलाओ फिर से..
मेरे अर्मा बीयाबानो मैं है फँसे हुएकी अपनी हँसी से हँसी तर बनाओ फिर से..
कब से सूख कर ज़र्रा हो गये लब इस कदरअपनी गीली ज़ुल्फ़ [...]
Posted by: bhaikush on: August 18, 2007
उदास रात है आज, आ जाओ फिर सेज़मी पे नूर की चादर बिछओ फिर से..
बड़े दीनो से सोया नही है इक पलकी अपनी पॅल्को में दिल को सुलाओ फिर से..
मेरे अर्मा बीयाबानो मैं है फँसे हुएकी अपनी हँसी से हँसी तर बनाओ फिर से..
कब से सूख कर ज़र्रा हो गये लब इस कदरअपनी गीली ज़ुल्फ़ [...]
Posted by: bhaikush on: August 18, 2007
हालाँकि मैं इस काबिल नही की मैं इस विषय पर लिखू.. परंतु आज रहा नही गया.. तो लिख दिया..आप सभी का आशीर्वाद चाहूँगा..
अपने नंद नंदन जा रहे है अपनी टोली लेकर.. और आज ही मय्या के कई बार समझाने के बाद भी राधा जी ने ज़िद कर ली की वो दही बेचने जाएगी.. अपनी सखियो [...]
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