“कुश की कलम”

Archive for December 2007

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पिछ्ले वीकेंड पर डाक बंगले मेंबढ़िया कॅंप फ़ायर हुई थी…देर तक घड़ी के नुंबरो मेंअटकी रही सुई थी..
मिसटर शर्मा मिसेज़ वर्माकपूर साहब .. मिसेज़ चॉप्रासब के सब कपल आए हुए थेजाम पे जाम मेहफ़ील में छ्ाए हुए थे
टेबल पर वोड्का की बॉटल के पासगोल्डन कलर का रखा था बॉक्ससारे मिसटर ने अपनी कार की चाबियाडाल [...]

छन्न से तू चली आई मेरे सपनो मेंहसी फिर लबो पर खिलखिलाई मेरे सपनो में…
संगिनी बन तू संग.. रहेगी जीवन भर उम्मीद की इक कली खिल आई मेरे सपनो में…
जो रज़ा थी छुपी तेरे दिल [...]

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पिछ्ले वीकेंड पर डाक बंगले मेंबढ़िया कॅंप फ़ायर हुई थी…देर तक घड़ी के नुंबरो मेंअटकी रही सुई थी..
मिसटर शर्मा मिसेज़ वर्माकपूर साहब .. मिसेज़ चॉप्रासब के सब कपल आए हुए थेजाम पे जाम मेहफ़ील में छ्ाए हुए थे
टेबल पर वोड्का की बॉटल के पासगोल्डन कलर का रखा था बॉक्ससारे मिसटर ने अपनी कार की चाबियाडाल [...]

छन्न से तू चली आई मेरे सपनो मेंहसी फिर लबो पर खिलखिलाई मेरे सपनो में…
संगिनी बन तू संग.. रहेगी जीवन भर उम्मीद की इक कली खिल आई मेरे सपनो में…
जो रज़ा थी छुपी तेरे दिल [...]

"…कुछ क्षनिकाए…."

Posted by: bhaikush on: December 1, 2007

==========
दूर अंतरिक्ष सेगिरा था एक उल्का पींडसीधा टकराया मेरीकल्पनाओ से..
तुम्हारे टुकड़े टुकड़ेकैसे संभाल करजोड़े थे मैने…
==========
फिर रात को संभाला था तुमने..कैसे आसमा सेज़मी पर आ गयी थीसाथी की तलाश में..
तुम्हे देख लिया था शायदआज अमवास जो है..
============
उम्मीद बूझने वाली हैमगर जाने कॉनसातेल डाल रखा है..लौ बूझने का नाम नही [...]

तेरी हर नज़र शरार्त है…..

Posted by: bhaikush on: December 1, 2007

—————–
ज़ुल्फ़ो में लगे गुलाब कोदेख कर शरमाती..तेरी हर नज़र शरार्त है….
माथे की बिंदिया चूम करनिगाओ में छुप जाती…तेरी हर नज़र शरार्त है…….
निगाओ से होते हुए..लबो पर ज़रा ठहरती,..तेरी हर नज़र शरार्त है……
लबो की सहराओ से निकलगर्दन पर मचल जातीतेरी हर नज़र शरार्त है….
गर्दन से उतरती होलेसीने में दफ़न हो जाती..तेरी हर नज़र शरार्त है…..
सीने में [...]

"…कुछ क्षनिकाए…."

Posted by: bhaikush on: December 1, 2007

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दूर अंतरिक्ष सेगिरा था एक उल्का पींडसीधा टकराया मेरीकल्पनाओ से..
तुम्हारे टुकड़े टुकड़ेकैसे संभाल करजोड़े थे मैने…
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फिर रात को संभाला था तुमने..कैसे आसमा सेज़मी पर आ गयी थीसाथी की तलाश में..
तुम्हे देख लिया था शायदआज अमवास जो है..
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उम्मीद बूझने वाली हैमगर जाने कॉनसातेल डाल रखा है..लौ बूझने का नाम नही [...]

तेरी हर नज़र शरार्त है…..

Posted by: bhaikush on: December 1, 2007

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ज़ुल्फ़ो में लगे गुलाब कोदेख कर शरमाती..तेरी हर नज़र शरार्त है….
माथे की बिंदिया चूम करनिगाओ में छुप जाती…तेरी हर नज़र शरार्त है…….
निगाओ से होते हुए..लबो पर ज़रा ठहरती,..तेरी हर नज़र शरार्त है……
लबो की सहराओ से निकलगर्दन पर मचल जातीतेरी हर नज़र शरार्त है….
गर्दन से उतरती होलेसीने में दफ़न हो जाती..तेरी हर नज़र शरार्त है…..
सीने में [...]