“कुश की कलम”

Archive for March 2008

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सुबह अपनी किस्मत पर हँसी आया ना करेउनसे कहिए क़ी रात ख्वाबो में आया ना करे
अश्क गिर पड़ते है जब भी सुनता हू मैं…उनसे कहिए क़ी यू ग़ज़ल गाया ना करे….
हमसे मुलाकात अब दोबारा मुमकिन ही नही…उनसे कहिए क़ी सोच कर वक़्त जाया ना करे….
गर दे नही सकता है बन्दो को वो खुदा..तो [...]

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सुबह अपनी किस्मत पर हँसी आया ना करेउनसे कहिए क़ी रात ख्वाबो में आया ना करे
अश्क गिर पड़ते है जब भी सुनता हू मैं…उनसे कहिए क़ी यू ग़ज़ल गाया ना करे….
हमसे मुलाकात अब दोबारा मुमकिन ही नही…उनसे कहिए क़ी सोच कर वक़्त जाया ना करे….
गर दे नही सकता है बन्दो को वो खुदा..तो [...]

तेरे नाम का रंग..

Posted by: bhaikush on: March 24, 2008

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रंगलगा दिया था तुमनेचुपके सेआकर के मेरेगालो पर..पूरे मोहल्ले मेंखबर फैली थी..तुम्हारा नामपहली बार मेरेनाम के साथ आयाथा.. और इक ऐसेरंग में रंगी थी मैंक़ी फिर कभी छूट ना पायामेरे बाबूजी से तुमनेअपनी पसंद बताई थीफिर तुम्हारा नाम मेरेनाम के साथ आया थाबस उस दिन से…तुम्हारे रंग में जो रंगी थीउसी को [...]

तेरे नाम का रंग..

Posted by: bhaikush on: March 24, 2008

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रंगलगा दिया था तुमनेचुपके सेआकर के मेरेगालो पर..पूरे मोहल्ले मेंखबर फैली थी..तुम्हारा नामपहली बार मेरेनाम के साथ आयाथा.. और इक ऐसेरंग में रंगी थी मैंक़ी फिर कभी छूट ना पायामेरे बाबूजी से तुमनेअपनी पसंद बताई थीफिर तुम्हारा नाम मेरेनाम के साथ आया थाबस उस दिन से…तुम्हारे रंग में जो रंगी थीउसी को [...]

कृपया इसे ना पढ़े

Posted by: bhaikush on: March 17, 2008

शीर्षक पढ़कर चौकियगा नही, क्योकि यदि इसका शीर्षक भारतीय सभ्यता या संस्क्रती होता तो शायद ही इसे कोई पढ़ता, क्योंकि हमारे यहा लोग विदेशी विषयो को शीग्रता से अपना लेते है, ऐसे लोगो में युवाओ की संख्या अधिक है.. और ये युवा विदेशी त्यौहारो को भारतीय त्यौहार की अपेक्षा अधिक हर्षोल्लास से मानते है.. अभी [...]

त्रिवेणी

Posted by: bhaikush on: March 17, 2008

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<a href=”http://www.chitthajagat.in/?claim=m2rwnhxoqmwp” title=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी”><img src=”http://www.chitthajagat.in/images/claim.gif” border=”0″ alt=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी” title=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी”;></a>
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कभी pathik को राह दिखा दी
कभी pathik की प्यास बुझा दी
कुम्हार के इशारो पर नाचती है मिट्टी 
 ”हँसी,ख़ुशी उमंग,आँसू,
प्यार ही प्यार हैर सू,
खुदा कही आसपास लगता है”

कृपया इसे ना पढ़े

Posted by: bhaikush on: March 17, 2008

शीर्षक पढ़कर चौकियगा नही, क्योकि यदि इसका शीर्षक भारतीय सभ्यता या संस्क्रती होता तो शायद ही इसे कोई पढ़ता, क्योंकि हमारे यहा लोग विदेशी विषयो को शीग्रता से अपना लेते है, ऐसे लोगो में युवाओ की संख्या अधिक है.. और ये युवा विदेशी त्यौहारो को भारतीय त्यौहार की अपेक्षा अधिक हर्षोल्लास से मानते है.. अभी [...]

“…कुछ क्षनिकाए….”

Posted by: bhaikush on: March 15, 2008

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दूर अंतरिक्ष से
गिरा था एक उल्का पींड
सीधा टकराया मेरी
कल्पनाओ से..
तुम्हारे टुकड़े टुकड़े
कैसे संभाल कर
जोड़े थे मैने…
==========
फिर रात को संभाला था तुमने..
कैसे आसमा से
ज़मी पर आ गयी थी
साथी की तलाश में..
तुम्हे देख लिया था शायद
आज अमवास जो है..
============
उम्मीद बूझने वाली है
मगर जाने कॉनसा
तेल डाल रखा है..
लौ बूझने का नाम नही लेती
हर थोड़ी देर बाद
और भड़क [...]

कौन कहता है इफ़लासी मिट गयी दुनिया से
जिस्म पर गहरी कोडो की मार अब भी है
कहता है कोई दोस्ती हो गयी दोनो मेंैं अब
मगर चोटी पर खड़ी इक दीवार अब भी है
कोई कहता है राम का नाम बेमानी है……….
पर होता यहा दीवाली का त्योहार अब भी है
ज़माने की रफ़्तार ने पकड़ी [...]

~~~ पतंग ~~~

Posted by: bhaikush on: March 15, 2008

रोज़ गगन में हज़ारो पतंग
के साथ वो भी उड़ती थी..
लहराती मचलती.. आसमानो से
बातें करती हुई…
इक डोर थी जो उसको थामे रखती थी
डोर से बंधी वो पतंग..
उँचइयो में गोते लगा कर
लौट आती थी…
इक शाम एक एक कर सारी
पतंगे उतर गयी थी…
इक्का दुक्का पतंगे थी
और वो भी बहुत दूर..
अचानक कही से एक [...]