"नयी तरंग है…
Posted by: bhaikush on: March 13, 2008
~~~~~~~~~~
“नयी तरंग है…
नयी उमंग है…
नयी है जागी हुई
हर दिशा…..
कोमल कोमल
पंख हिलाती
महक रही है
हर लता.. ….
अनेक पुष्प
बिखर रहे है
निखर रही है
अदभुत छटा….
गीली गीली
माटी की खुशबू
बरस गयी है
पगली घटा….
रेत भी चंचल
उड़ रही है..
नैनो में जाकर
करती ख़ता..
सूरज बेचारा
गिर गया है
जैसे हो उसका
पंख कटा..
रात चोरनी
जैसे आई..
सांझ को भी
ना चला पता..
ना कोई देखे
ना कोई जाने
अब तो सजनी
घूँघट उठा…”
March 13, 2008 at 2:12 pm
अच्छे भाव हैं।