Posted by: bhaikush on: March 15, 2008
कौन कहता है इफ़लासी मिट गयी दुनिया से
जिस्म पर गहरी कोडो की मार अब भी है
कहता है कोई दोस्ती हो गयी दोनो मेंैं अब
मगर चोटी पर खड़ी इक दीवार अब भी है
कोई कहता है राम का नाम बेमानी है……….
पर होता यहा दीवाली का त्योहार अब भी है
ज़माने की रफ़्तार ने पकड़ी है और तेज़ी
बेटी, पिता के कांधो का भर अब भी है
मा को छोड़ कर चला जाता है बेटा
रुपयो से बड़े दिनार अब भी है….
चार लोग एक कमरे मेंैं पसर के सोते है
महफूज़ रखा हुआ चार मीनार अब भी है
बुरा होता है, दिखता है और करते भी है
गाँधी की फोटो पर लगा इक हार अब भी है…
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