Posted by: bhaikush on: June 30, 2008
बात है स्कूल के दिनो की.. फिज़िक्स का प्रेक्टिकल था उस दिन.. आम तौर पर बायो वालो के लिए थोड़ा सा मुश्किल ही होता है फिज़िक्स समझना.. डा.साहब भी सहमत होंगे मुझसे..खैर सर ने पहले ही आकर बता दिया की स्पेक्टरॉमीटर सेट है जाकर के सिर्फ़ रीडिंग ले लेना उसे छेड़ना मत वरना रीडिंग्स [...]
Posted by: bhaikush on: June 30, 2008
बात है स्कूल के दिनो की.. फिज़िक्स का प्रेक्टिकल था उस दिन.. आम तौर पर बायो वालो के लिए थोड़ा सा मुश्किल ही होता है फिज़िक्स समझना.. डा.साहब भी सहमत होंगे मुझसे..खैर सर ने पहले ही आकर बता दिया की स्पेक्टरॉमीटर सेट है जाकर के सिर्फ़ रीडिंग ले लेना उसे छेड़ना मत वरना रीडिंग्स [...]
Posted by: bhaikush on: June 30, 2008
बात है स्कूल के दिनो की.. फिज़िक्स का प्रेक्टिकल था उस दिन.. आम तौर पर बायो वालो के लिए थोड़ा सा मुश्किल ही होता है फिज़िक्स समझना.. डा.साहब भी सहमत होंगे मुझसे..खैर सर ने पहले ही आकर बता दिया की स्पेक्टरॉमीटर सेट है जाकर के सिर्फ़ रीडिंग ले लेना उसे छेड़ना मत वरना रीडिंग्स [...]
Posted by: bhaikush on: June 28, 2008
पिछली कड़ी में आपने देखा किस तरह चंदू फुलो के घर तक जाने में कामयाब हुआ, फुलो का भाई माखन चंदू को घर में ले गया.. चंदू खटिया पर बैठा ही था की एक आवाज़ आई..
चंदू!! पीछे से एक आवाज़ आई.. चंदू ने मुड़कर देखा तो फुलो खड़ी थी.. पीले सलवार कमीज़ और सफेद [...]
Posted by: bhaikush on: June 28, 2008
पिछली कड़ी में आपने देखा किस तरह चंदू फुलो के घर तक जाने में कामयाब हुआ, फुलो का भाई माखन चंदू को घर में ले गया.. चंदू खटिया पर बैठा ही था की एक आवाज़ आई..
चंदू!! पीछे से एक आवाज़ आई.. चंदू ने मुड़कर देखा तो फुलो खड़ी थी.. पीले सलवार कमीज़ और सफेद [...]
Posted by: bhaikush on: June 28, 2008
पिछली कड़ी में आपने देखा किस तरह चंदू फुलो के घर तक जाने में कामयाब हुआ, फुलो का भाई माखन चंदू को घर में ले गया.. चंदू खटिया पर बैठा ही था की एक आवाज़ आई..
चंदू!! पीछे से एक आवाज़ आई.. चंदू ने मुड़कर देखा तो फुलो खड़ी थी.. पीले सलवार कमीज़ और सफेद [...]
Posted by: bhaikush on: June 27, 2008
नमस्कार दोस्तो..
लावण्या जी, नीलिमा जी और अल्पना जी के सुझाव मिले पाठको के सवाल भी ‘कॉफी विद कुश’ में शामिल करने के लिए.. सबसे पहले तो आपके सुझावो के लिए हार्दिक धन्यवाद.. दरअसल पहले वाले तीन एपिसोड पहले ही बन चुके थे.. मगर अब इसे शुरू किया जा सकता है..
यदि आप भी पूछना [...]
Posted by: bhaikush on: June 27, 2008
नमस्कार दोस्तो..
लावण्या जी, नीलिमा जी और अल्पना जी के सुझाव मिले पाठको के सवाल भी ‘कॉफी विद कुश’ में शामिल करने के लिए.. सबसे पहले तो आपके सुझावो के लिए हार्दिक धन्यवाद.. दरअसल पहले वाले तीन एपिसोड पहले ही बन चुके थे.. मगर अब इसे शुरू किया जा सकता है..
यदि आप भी पूछना [...]
Posted by: bhaikush on: June 27, 2008
नमस्कार दोस्तो..
लावण्या जी, नीलिमा जी और अल्पना जी के सुझाव मिले पाठको के सवाल भी ‘कॉफी विद कुश’ में शामिल करने के लिए.. सबसे पहले तो आपके सुझावो के लिए हार्दिक धन्यवाद.. दरअसल पहले वाले तीन एपिसोड पहले ही बन चुके थे.. मगर अब इसे शुरू किया जा सकता है..
यदि आप भी पूछना [...]
Posted by: bhaikush on: June 25, 2008
कुछ क्षणिकाए -
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तुमने आकर कहा था ये मुलाकात अब आख़िरी हैमैं तो था जैसेवैसे ही खड़ा रहा… मगररात के माथे पर शिकनदेखी मैने..
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पंजो के बल खड़े होकरतुम चूम लेती हो मुझे..रिश्तो की लंबाईकद से नापी तो नही जाती..
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तेरे साथ बिताए पलआ जाते है अक्सर ख्यालो में..बड़ी बेरहमी से पकड़के गिरेबान मेरा.. कई सवालपूछते है……लबो पे [...]
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