“कुश की कलम”

Archive for August 2008

छोटी सी थी मैंजब अब्बु रोज़ चवन्नी दियाकरते थे.. एक मेरीऔर दूसरी रमज़ान कीहोती थी..साथ साथमस्जिद के परले वालीदुकान से चकलीख़रीदने जाते थेएक दिन रमज़ान नेमेरी चकली गिरा दीमैने ग़ुस्से मेंआकर उसकी चवन्नीछीन ली.. और भाग करपहुँची बानो कीछत पर.. रमज़ान पीछेपीछे आया. तो उछाल दीआसमान में .. उस [...]

छोटी सी थी मैंजब अब्बु रोज़ चवन्नी दियाकरते थे.. एक मेरीऔर दूसरी रमज़ान कीहोती थी..साथ साथमस्जिद के परले वालीदुकान से चकलीख़रीदने जाते थेएक दिन रमज़ान नेमेरी चकली गिरा दीमैने ग़ुस्से मेंआकर उसकी चवन्नीछीन ली.. और भाग करपहुँची बानो कीछत पर.. रमज़ान पीछेपीछे आया. तो उछाल दीआसमान में .. उस [...]

वो गर्म शाम जब आख़िरी दफ़ा हम प्याला हुए थे हम दोनो.. अब भी मेरे जेहनमें जमी सीलन पर फिसलकर आती है मेरी यादो में.. हाँ वही गर्म शाम जब हम प्याला हुए थे हम दोनो..
मैं तिराहे वाले कॉफी शॉप की आराम कुर्सी पर बैठा था.. की तुम ले आई कॉफी के दो गरम [...]

वो गर्म शाम जब आख़िरी दफ़ा हम प्याला हुए थे हम दोनो.. अब भी मेरे जेहनमें जमी सीलन पर फिसलकर आती है मेरी यादो में.. हाँ वही गर्म शाम जब हम प्याला हुए थे हम दोनो..
मैं तिराहे वाले कॉफी शॉप की आराम कुर्सी पर बैठा था.. की तुम ले आई कॉफी के दो गरम [...]

सब हैरान है परेशान है.. अमा! ये कौनसा त्योहार है? .. अगर आपको पता चले तो ज़रूर बताइए..

क्या कहा?? कृष्ण जन्माष्टमी ? अरे नही जी ये कृष्णा जन्माष्टमी भी नही है…
ये तो कोई और ही त्योहार है.. जानना चाहते है कौनसा तो देखिए..
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ये लीजिए जवाबी फोटो

वो आ रही है आपसे मिलने.. खिलखिलाते हुए.. हंसते गाते हुए.. आपके दिल में जगह बनाने के लिए.. बस इतना तो उसके लिए कीजिएगा की उसे अपने दिल में जगह दीजिएगा.. वो बहुत भोली.. बहुत मासूम.. और बहुत कोमल सोच रखती है.. जी हा दोस्तो वो नेस्बी है आँखो को सुकून देने वाली..
नेस्बी के लिए [...]

वो आ रही है आपसे मिलने.. खिलखिलाते हुए.. हंसते गाते हुए.. आपके दिल में जगह बनाने के लिए.. बस इतना तो उसके लिए कीजिएगा की उसे अपने दिल में जगह दीजिएगा.. वो बहुत भोली.. बहुत मासूम.. और बहुत कोमल सोच रखती है.. जी हा दोस्तो वो नेस्बी है आँखो को सुकून देने वाली..
नेस्बी के लिए [...]

क्या अभी भी आप यही कहते है की भारतीय नारी कमज़ोर है??

क्या अभी भी आप यही कहते है की भारतीय नारी कमज़ोर है??

छपाक !!

Posted by: bhaikush on: August 7, 2008

छपाक !! टेबल पर पड़ी पानी की गिलास नीचे गिर पड़ी, एक तो इतना सारा सामान बिखरा है टेबल पर एक गिलास भी नही टिकती.. शाम हो चुकी है.. आज फिर लेट हो गया.. सोचा था जल्दी पहुँचा तो राजमा चावल बनाऊंगा.. पर फिर लेट हो गया रास्ते से मैगी ले लूँगा.. ..
मोहन बाबू, [...]