“कुश की कलम”

Archive for March 2009

जब देर रात तकखामोशी बैठीरही थी.. उस कमरे मेंतुमने भी एकनमी महसूस क़ीहोगी अपने सीने परएक दूसरे से लिपट करकितना रोए थे ना हम…

प्रेम का मतलब सिर्फ़ पाना ही तो नही होता.. दे जाने में जो प्यार है उसकी खुमारी तो सांसो में घुल जाती है.. इतनी कोमल जैसे रूही का कोई फ़ाहा ले रखा [...]

जब देर रात तकखामोशी बैठीरही थी.. उस कमरे मेंतुमने भी एकनमी महसूस क़ीहोगी अपने सीने परएक दूसरे से लिपट करकितना रोए थे ना हम…

प्रेम का मतलब सिर्फ़ पाना ही तो नही होता.. दे जाने में जो प्यार है उसकी खुमारी तो सांसो में घुल जाती है.. इतनी कोमल जैसे रूही का कोई फ़ाहा ले रखा [...]

नमस्कार दोस्तो..
जानता हू कॉफी क़ी महक कब से आ रही है.. पर कॉफी नही आ रही है.. आपको भी लग रहा होगा कि इतना टाइम क्यो लग रहा है.. अब क्या करे आचार सहिता लग चुकी है.. ऊपर से सारी पुलिस फोर्स नेताओ के पीछे लग गयी है.. इसी चक्कर में पल्लवी जी भी कही [...]

छम्मक छल्लो.

Posted by: bhaikush on: March 13, 2009

ये कहानी है मेरी एक शोर्ट फ़िल्म की जो मैंने अभी शुरू की है.. .इस से पहले मेरी जिन कहानियो पर शोर्ट फिल्म्स बना चुका हु वे है.. पन्ने हवा में अभी भी उड़ रहे थे.., ज़िन्दगी कभी यू भी मुड़ जाती है.., एक सिगरेट और जल गई.. अब शुरू करते है मेरी नई [...]

छम्मक छल्लो.

Posted by: bhaikush on: March 13, 2009

ये कहानी है मेरी एक शोर्ट फ़िल्म की जो मैंने अभी शुरू की है.. .इस से पहले मेरी जिन कहानियो पर शोर्ट फिल्म्स बना चुका हु वे है.. पन्ने हवा में अभी भी उड़ रहे थे.., ज़िन्दगी कभी यू भी मुड़ जाती है.., एक सिगरेट और जल गई.. अब शुरू करते है मेरी नई [...]

टॉम कहे चलो होलियाएडिक कहे चलो होलियाएहैरी कहे चलो होलियाएहम कहा चलो हम भी होलियाए..
उपरोक्त पंक्तियो का किसी भी घटना या किसी व्यक्ति से संबंध है तो सही.. पर किस से है ये पता नही चल पा रहा है.. पता चलते ही आपको सूचित किया जायेगा..
तो जी बात ऐसी है.. कि कल शायद हम खिसकले [...]