“कुश की कलम”

Archive for May 2009

जितनी शिद्दत से मैं मंदिर के सामने से गुज़रते वक़्त सजदा करता हूँ उसी भावना से किसी मस्जिद पर भी सर झुकाता हूँ.. गुरूद्वारे और चर्चो पर भी इसी तरह की एक प्रक्रिया स्वत: ही हो जाती है.. और यकीन मानिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.. ये बिलकुल सहज है..
दरअसल हम [...]

जितनी शिद्दत से मैं मंदिर के सामने से गुज़रते वक़्त सजदा करता हूँ उसी भावना से किसी मस्जिद पर भी सर झुकाता हूँ.. गुरूद्वारे और चर्चो पर भी इसी तरह की एक प्रक्रिया स्वत: ही हो जाती है.. और यकीन मानिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.. ये बिलकुल सहज है..
दरअसल हम [...]

पचास की स्पीड से चलती मेरी गाडी के सामने से गुजरते ही एक साईकिल वाला ब्रेक लगाता है और रुक जाता है.. ये वो कन्डीशन है जब मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता है.. मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि कोई साईकिल वाले को ब्रेक नहीं लगाना पड़े.. क्योंकि मैं तो एक्सीलरेटर दबा कर स्पीड बढा [...]

पचास की स्पीड से चलती मेरी गाडी के सामने से गुजरते ही एक साईकिल वाला ब्रेक लगाता है और रुक जाता है.. ये वो कन्डीशन है जब मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता है.. मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि कोई साईकिल वाले को ब्रेक नहीं लगाना पड़े.. क्योंकि मैं तो एक्सीलरेटर दबा कर स्पीड बढा [...]

हमेफोन उठाते ही आवाज़ आई क्रिकेटर ले लो.. क्रिकेटर ले लो.. हम बौखलाए.. भाई ये क्या है.. नयी रिंगटोन. नया फोन.. और लोन के लिए तो फोन आते थे ये अब क्रिकेट का क्या चक्कर है. हमने पूछा भय्ये माज़रा क्या है.. क्या बक बक कर रहे हो..? वो बोला देखिए श्रीमान मैं तमीज़ से [...]

हमेफोन उठाते ही आवाज़ आई क्रिकेटर ले लो.. क्रिकेटर ले लो.. हम बौखलाए.. भाई ये क्या है.. नयी रिंगटोन. नया फोन.. और लोन के लिए तो फोन आते थे ये अब क्रिकेट का क्या चक्कर है. हमने पूछा भय्ये माज़रा क्या है.. क्या बक बक कर रहे हो..? वो बोला देखिए श्रीमान मैं तमीज़ से [...]