Posted by: bhaikush on: July 30, 2009
सुगर क्यूब पिक्चर प्रजेंट्स “पापाजी“
रद्दी पेप्पर..तपती दोपहरी में बाहर रद्दी वाले ने आवाज़ लगायी.. मैं उठ गया था.. मुझे लगा अखबार बहुत हो गए है इन्हें रद्दी में बेच दिया जाना चाहिए.. मैंने उस से पुछा अखबार का क्या भाव है.. वो बोला अंग्रेजी है या हिंदी?मैंने कहा तुझे कौनसा पढना है? तू भाव बता..अंग्रेजी [...]
Posted by: bhaikush on: July 13, 2009
उछालता कोई मुझे तोखिलखिला देती…मुस्कुराता कोई तोपलकें हिला देती..
पूछता कोई जो कुछजवाब आँखें हिला कर देती..गोद मैं उठाता कोई तोउसे गीला कर देती..
डाँटता कोई मुझे तोझटमूट् रोती..आती जब नींद तोमाँ की गोद में सोती..
मम्मी की पहन साड़ीश्रृंगार मैं करती..आ जाए ना कोई कमरे मेंइस बात से डरती…
दादा को पकड़ करघोड़ा मैं बनाती..ज़्यादा तो नही परखाना, [...]
Posted by: bhaikush on: July 9, 2009
अभी बाहर बारिश हो रही है.. हाथ की बोर्ड पर टक टक कर रहे है.. नज़रे खिड़की पर जमा है.. और मन है कि सोच रहा है एक फर्लांग भर कर सीधा सड़क पर पहुँच जाए और बारिश में दो चार ठुमके लगा ले.. ये बारिशे भी कितनी जालिम होती है.. हमेशा तब [...]
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