“कुश की कलम”

Archive for the ‘Uncategorized’ Category

हलकट दुनिया का सिपाही..

Posted by: bhaikush on: August 25, 2009

हलकट दुनिया के पिछवाडे पर लात देकर उसने गाडी स्टार्ट कर दी थी.. लोग बाग़ सड़क पर दौड़ रहे थे.. सारी गाड़िया फूटपाथ पर चल रही थी.. अचानक किसी ने बिलकुल पास आकर ब्रेक मारा.. @$%#$% कुछ निकला था उसके मुंह से.. शायद कोई गन्दी गाली रही होगी.. नहीं गन्दी नहीं, सिर्फ गाली होगी.. गालिया [...]

लीम्बू सोडा..

Posted by: bhaikush on: August 6, 2009

आप हमेशा की तरह उन्हें मना रहे है.. उनको मानना ही है ये वो भी जानती है और आप भी.. फिर भी आप मना रहे है.. वो चाहती है बस थोडी देर और मनाया जाये.. आप कोशिश तो कर रहे है,, पर आपको प्रोमिस भी करना पड़ेगा.. कि आज के बाद आप उनके घरवालो के [...]

सुगर क्यूब पिक्चर प्रजेंट्स “पापाजी“

रद्दी पेप्पर..तपती दोपहरी में बाहर रद्दी वाले ने आवाज़ लगायी.. मैं उठ गया था.. मुझे लगा अखबार बहुत हो गए है इन्हें रद्दी में बेच दिया जाना चाहिए.. मैंने उस से पुछा अखबार का क्या भाव है.. वो बोला अंग्रेजी है या हिंदी?मैंने कहा तुझे कौनसा पढना है? तू भाव बता..अंग्रेजी [...]

उछालता कोई मुझे तो..

Posted by: bhaikush on: July 13, 2009

उछालता कोई मुझे तोखिलखिला देती…मुस्कुराता कोई तोपलकें हिला देती..
पूछता कोई जो कुछजवाब आँखें हिला कर देती..गोद मैं उठाता कोई तोउसे गीला कर देती..
डाँटता कोई मुझे तोझटमूट् रोती..आती जब नींद तोमाँ की गोद में सोती..
मम्मी की पहन साड़ीश्रृंगार मैं करती..आ जाए ना कोई कमरे मेंइस बात से डरती…
दादा को पकड़ करघोड़ा मैं बनाती..ज़्यादा तो नही परखाना, [...]

अभी बाहर बारिश हो रही है.. हाथ की बोर्ड पर टक टक कर रहे है.. नज़रे खिड़की पर जमा है.. और मन है कि सोच रहा है एक फर्लांग भर कर सीधा सड़क पर पहुँच जाए और बारिश में दो चार ठुमके लगा ले.. ये बारिशे भी कितनी जालिम होती है.. हमेशा तब [...]

आँठवा अखबार

Posted by: bhaikush on: June 16, 2009

देर रात मालिनी आईने के सामने बैठी रही.. आने वाले मेहमान को निहार रही है.. बगल वाले कमरे के दरवाजे के खटखटाने की आवाज़ से बेखबर.. जानती है कि थोडी देर बाद ये आवाज़ बंद हो जायेगी.. रात और लम्बी होती जा रही है.. मालिनी सोने की कोशिश कर रही है.. वो जानती है कि [...]

मुसीबतों में भी लोगो को आशा की किरण नज़र आ जाती है.. देखिये ना हमारे घर के सामने करीब सौ सालो से जिन्दा एक महिला की मृत्यु हो गयी.. पता चला बीमार थी लेकिन मौत नहीं आ रही थी तो घर वालो ने उसे मुक्ति देने के लिए ४६ डिग्री टेम्प्रेचर में बिना [...]

मुसीबतों में भी लोगो को आशा की किरण नज़र आ जाती है.. देखिये ना हमारे घर के सामने करीब सौ सालो से जिन्दा एक महिला की मृत्यु हो गयी.. पता चला बीमार थी लेकिन मौत नहीं आ रही थी तो घर वालो ने उसे मुक्ति देने के लिए ४६ डिग्री टेम्प्रेचर में बिना [...]

जितनी शिद्दत से मैं मंदिर के सामने से गुज़रते वक़्त सजदा करता हूँ उसी भावना से किसी मस्जिद पर भी सर झुकाता हूँ.. गुरूद्वारे और चर्चो पर भी इसी तरह की एक प्रक्रिया स्वत: ही हो जाती है.. और यकीन मानिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.. ये बिलकुल सहज है..
दरअसल हम [...]

जितनी शिद्दत से मैं मंदिर के सामने से गुज़रते वक़्त सजदा करता हूँ उसी भावना से किसी मस्जिद पर भी सर झुकाता हूँ.. गुरूद्वारे और चर्चो पर भी इसी तरह की एक प्रक्रिया स्वत: ही हो जाती है.. और यकीन मानिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.. ये बिलकुल सहज है..
दरअसल हम [...]